
नेहरू कालोनी क्षेत्र में रहने वाली प्रिया को कुछ दिन पहले एक फोन आया। दूसरी तरफ मौजूद शख्स ने कहा कि उनका क्रेडिट कार्ड ब्लाक होने वाला है। उसे जारी रखने के लिए उसने प्रिया को मोबाइल पर एक लिंक भेजा। जिस पर क्लिक करने के कुछ सेकेंड बाद ही प्रिया का खाता खाली हो गया।
प्रिया ने मोबाइल पर खाते से पैसे निकलने का संदेश देखा तो आनन-फानन साइबर थाना पहुंचीं। जिस नंबर से प्रिया को फोन आया था और जिस अकाउंट में रुपये भेजे गए, पुलिस ने उनकी जांच की तो पता चला कि दोनों फर्जी नाम-पते पर हैं।
ऐसा केवल प्रिया के मामले में नहीं है, बल्कि साइबर ठगी की अधिकांश वारदातों में फर्जी सिम और फर्जी बैंक खाते का इस्तेमाल किया जाता है। यही चुनौती साइबर ठगों को पकड़ने की राह में पुलिस के लिए सबसे बड़ी बाधा बन रही है।
साइबर ठगी का मकड़जाल तेजी से फैल रहा है। एक छोटी-सी गलती और पलभर में आपका बैंक खाता साफ। साइबर ठगों के सबसे अहम हथियार हैं, बैंक खाता और मोबाइल नंबर। साइबर ठगी की कई वारदातों की जांच में सामने आया है कि ये आरोपित जिस शातिर तरीके से ठगी को अंजाम देते हैं, उसी तरह वारदात के लिए संसाधन भी जुटाते हैं।