
उत्तराखंड सरकार की ओर से कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानदारों को अपने नाम के बोर्ड लगाने के निर्देश जारी किए गए थे। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने नाम की बाध्यता समाप्त करने का निर्णय सुनाया है।
प्रतिष्ठानों पर नाम के साथ बोर्ड लगाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नाम की बाध्यता समाप्त कर दी है। इसको लेकर जब सोमवार को पड़ताल की गई तो अधिकांश प्रतिष्ठानों पर बोर्ड लगे थे। प्रतिष्ठान स्वामी से जब पूछा गया कि उन्होंने अभी नाम लिखे बोर्ड क्यों नहीं हटाए हैं तो उन्होंने बताया कि अब बोर्ड लगा दिया, तो लगा दिया। क्या फर्क पड़ता है नाम से।
उत्तराखंड सरकार की ओर से कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानदारों को अपने नाम के बोर्ड लगाने के निर्देश जारी किए गए थे। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने नाम की बाध्यता समाप्त करने का निर्णय सुनाया है। सोमवार को बाईपास पर सजी दुकानों पर पड़ताल की गई तो सभी पर नाम के बोर्ड लगे थे। दुकानदारों ने बताया कि नाम के जो बोर्ड लगे हैं लगे रहे, इससे क्या फर्क पड़ता है।
उनके यहां अच्छी साफ सफाई और शुद्ध भोजन की व्यवस्था है। लोग अपने आप आएंगे। कांवड़ यात्रा उनके लिए रोजगार लेकर आती है। अगर वह कोई गलत खाना-पीना परोसेंगे तो उनका ही नुकसान होगा।