
उत्तराखंड राज्य आगामी 9 नवंबर को अपना 25 वाँ राज्य स्थापना दिवस मना रहा है। राज्य स्थापना दिवस के लिए सभी लोग उत्साहित नजर आ रहे हैं .. लेकिन आज भी कुछ ऐसे सवाल है जिनका जवाब लोगों को नहीं मिल पाया है .. आखिर राज्य बनने के बाद राज्य वाशियो को मिला क्या ?




उत्तराखंड राज्य अब युवा हो चला है .. और इस युवा राज्य से राज्य के लोग कुछ सवाल पूछ रहे हैं जिसका जवाब जिम्मेदार लोग आज भी नहीं दे पाए है। तत्कालीन उत्तर प्रदेश के समय में 70 के दशक में पृथक राज्य की मांग शुरू हुई थी जो 90 के दशक में उग्र हो गई थी। 1994 में कई ऐसी घटनाक्रम घटे जिसमें राज्य के लोगों ने राज्य प्राप्ति के लिए शहादत दी। 40 से ज्यादा राज्य वासियों ने इस राज्य प्राप्ति के लिए अपने बलिदान दिए तब जाकर 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। तब से लेकर अब तक राज्य के लोग विकास की लंबी कहानी तो सुन रहे हैं सरकारों के वायदे भी सुन रहे हैं लेकिन आज भी उनके सपनों का उत्तराखंड नहीं बन पाया है। राज्यवासियों का दर्द अब कुछ सियासत दोनों के मुख से भी छलकने लगा है । 24 साल के बाद राज्य में लोग यही कह रहे है उन्हें क्या मिला .. राज्य के असल मुद्दे रोजगार, शिक्षा ओर स्वास्थ्य जैसे गंभीर विषय आज भी ज्वलंत समस्या बने हुए है।
राज्य की गंभीर समस्याओं का हल नहीं निकला .. भाजपा विधायक तो अपने को ओर सरकारन को कोसते हुए नजर आ रहे है । भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कहा सत्ता में जो भी रहे उनके लिए राज्य दूसरे नंबर पर रहा है.. पहला नंबर स्वयं के विकास पर रहा है।
बाइट – विनोद चमोली, विधायक, भाजपा
भाजपा विधायक के बयान पर कांग्रेस भी समर्थन कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा सरकारों की दृश्य इच्छा शक्ति कम रही है जिसका खामियाजा आज राज्य के लोग भुगत रहे है।
बाइट – शीशपाल बिष्ट, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस
उत्तराखंड राज्य शैशव अवस्था से आगे बढ़कर युवा हो चुका है।लेकिन इस सफर में अब भी कई ऐसे सवाल है जिनका जवाब आज तक नहीं मिल पाया है। और उन्हीं सवालों को सरकारें पीछे छोड़ रही है .. ताकि विकास दूसरे पर ओर अपना नाम पहले पर चल सके।