
संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता व वक्ता प्रदुमन त्यागी ने समाज को एकजुट करने वाला संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने गुरु रविदास जी के विचारों—समता, करुणा और मानवता—पर जोर देते हुए कहा कि आज के समय में इन मूल्यों को अपनाना सबसे बड़ी जरूरत है।
कार्यक्रम के दौरान प्रदुमन त्यागी ने “सात सौलह” को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि “सात सौलह” किसी भ्रम या विभाजन का कारण नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने वाला प्रतीक है—जो बराबरी, आपसी सम्मान और सामाजिक चेतना का संदेश देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस शब्द का गलत अर्थ निकालकर समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि इसका उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, तोड़ना नहीं।
प्रदुमन त्यागी ने कहा, “गुरु रविदास जी ने हमें सिखाया कि इंसान की पहचान उसके कर्म से होती है, जाति या वर्ग से नहीं। ‘सात सौलह’ भी इसी विचारधारा को आगे बढ़ाने का माध्यम है।” उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहकर सच्चे इतिहास और संतों की शिक्षाओं को समझें।
रिपोर्टर ओमपाल कश्यप




