उत्तराखंड

दून स्मार्ट सिटी परियोजना में भारी अनियमितता; बिना टेंडर के 2.93 करोड़ के काम कराए

वर्ष 2017 में देहरादून को स्मार्ट सिटी परियोजना में चयन किया गया। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने वर्ष 2018 से 2023 तक की अवधि में किए गए काम पर ऑडिट किया।

केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने के कार्येां में अनियमितता पाई गई। बिना टेंडर के 2.93 करोड़ के काम कराए गए। वहीं समयवधि पर काम पूरा न करने पर कार्यदायी संस्था से 19 करोड़ की वसूली नहीं की गई। 5.91 करोड़ की लागत से देहरादून के तीन सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर लैब, इंटरेक्टिव बोर्ड, प्रोजेक्टर, ई-कंटेंट, सीसीटीवी, बायोमीट्रिक मशीनें लगाई गई थीं, लेकिन उन्हें शुरू नहीं किया गया।वर्ष 2017 में देहरादून को स्मार्ट सिटी परियोजना में चयन किया गया। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने वर्ष 2018 से 2023 तक की अवधि में किए गए काम पर ऑडिट किया। कैग रिपोर्ट के अनुसार स्मार्ट सिटी के काम जून 2023 तक पूरे किए जाने थे। लेकिन इसे 2024 तक बढ़ाया गया। परियोजना के लिए एक हजार करोड़ का बजट प्रावधान किया गया। वर्ष 2016 से 2023 तक 737 करोड़ की धनराशि जारी की गई। इसके सापेक्ष 634.11 करोड़ की राशि खर्च की गई। स्मार्ट सिटी का काम देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड (डीएससीएल) को सौंपा गया था।कैग ने स्मार्ट सिटी के सभी 22 परियोजनाओं का ऑडिट किया। रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि दून कमांड एंड कंट्रोल सेंटर परियोजना के ई-गर्वेनेंस समाधान के तहत ठोस कूड़ा प्रबंधन की निगरानी के लिए मार्च 2022 में विकसित बायोमीट्रिक एवं सेंसर प्रणाली को फरवरी 2025 तक लागू नहीं किया गया। इससे 4.55 करोड़ का व्यय निष्फल रहा। स्मार्ट अपशिष्ट वाहन योजना के तहत 90 लाख से खरीदे गए ई-रिक्शा का दो साल तक संचालन नहीं हुआ।

पर्यावरण सेंसरों पर 2.62 करोड़ खर्च, उपयोग हुआ नहीं
देहरादून शहर में मौसम की जानकारी देने के लिए पर्यावरण सेंसर लगाए गए। इस पर 2.62 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा मल्टी यूटिलिटी डक्ट पर 3.24 करोड़ खर्च किए। लेकिन इनका उपयोग नहीं हुआ। कार्यदायी संस्था ने परियोजना प्रबंधन सलाहकार को अधूरी परियोजना के बावजूद भुगतान किया गया। सिटीज इंवेस्टमेंट टू इनोवेट, इंटीग्रेट एंड सस्टेन परियोजना के क्रियान्वयन के लिए परियोजना प्रबंधन सलाहकार के भुगतान में 5.19 करोड़ की अनियमितता पाई गई।

आठ परियोजनाओं के काम में 38 महीने की देरी
कार्यदायी संस्था को बाधा रहित कार्य स्थल उपलब्ध न कराने पर आठ परियोजनाओं के काम में 38 महीने की देरी हुई है। लेकिन अग्रिम राशि का समायोजन नहीं किया गया। काम में देरी के लिए 1.41 करोड़ का दर्थदंड न लगाकर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया। गलत वित्तीय प्रबंधन के कारण 6.20 करोड़ के ब्याज का नुकसान हुआ है।

130 स्मार्ट पोल में से 27 ही लगे
डीएससीएल ने स्मार्ट पोल परियोजना बनाई थी। इसके तहत शहर में 130 स्मार्ट पोल व 100 किमी तक ओएफसी बिछाने का काम होना था। 2023 तक 27 स्मार्ट पोल व 70 किमी. ओएफसी बिछाई गई।

ई-बसों के संचालन से 11.26 करोड़ का नुकसान
प्रदूषण को कम करने के लिए शहर में 41.56 करोड़ की इलेक्ट्रिक बस परियोजना शुरू की गई। 2020 में 30 बसों का संचालन शुरू किया गया। योजना की डीपीआर में 2019 से 2026 तक किराए व विज्ञापन से प्राप्त होने वाले राजस्व में 36.99 करोड़ नुकसान का अनुमान लगाया था। मार्च 2023 तक 11.26 करोड़ का नुकसान हुआ है। ई-बसों के संचालन से 3.93 लाख दैनिक राजस्व के सापेक्ष 1.29 लाख की आय हुई है।

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