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शिक्षकों को गृह जिले में आने-जाने के लिए मिलेगा दो दिन का यात्रा अवकाश

प्रदेश की विकट भौगोलिक परिस्थितियों एवं पर्याप्त यातायात की सुविधा न होने की वजह से शिक्षकों का यात्रा में एक दिन से अधिक का समय लग जाता है। विधानसभा में भी यह मामला उठ चुका है। 

प्रदेश में शिक्षकों को गृह जिले में आने-जाने के लिए यात्रा अवकाश बहाल होगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने राजकीय शिक्षक संघ से वार्ता के बाद दो दिन के यात्रा अवकाश के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। पूर्ववर्ती राज्य उत्तर प्रदेश में पर्वतीय क्षेत्रों के निवासी शिक्षकों, कर्मचारियों को इसका लाभ मिलता था, लेकिन उत्तराखंड अलग राज्य गठन के बाद यात्रा अवकाश रद्द कर दिया गया।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने शासन को भेजे प्रस्ताव में कहा, उत्तराखंड राज्य गठन से पहले उत्तर प्रदेश में पर्वतीय क्षेत्रों के निवासी कर्मचारियों को साल में एक बार अपने घर आने जाने के लिए आकस्मिक अवकाश के साथ यात्रा अवधि के लिए विशेष अवकाश की सुविधा दी गई थी, लेकिन उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उत्तर प्रदेश में पर्वतीय क्षेत्र न होने को ध्यान में रखते हुए यूपी शासन ने सात जनवरी 2003 को इस आदेश को रद्द कर दिया था।

प्रस्ताव में कहा गया है कि शिक्षकों को साल में दीर्घावकाश एवं 14 दिन का आकस्मिक अवकाश अनुमन्य है। अधिकतर शिक्षकों के गृह क्षेत्र एवं कार्यरत विद्यालयों की दूरी अधिकतम लगभग छह सौ किलोमीटर है।

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