
कांग्रेस पार्टी मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी जी ने अनिल बलूनी जी गढ़वाल सीट प्रत्याशी के पलायन रोकने वाले बयान को हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि वह चुनाव प्रचार में जहां भी जा रहे हैं घूम-घूम कर लोगों को बता रहे हैं कि मैं पलायन पर बहुत काम करूंगा, यदि मुझे पौड़ी गढ़वाल की जनता ने आशीर्वाद दिया तो मैं पलायन रोकने का पूरा प्रयास करूंगा, साथ ही कहा कि उत्तराखंड 23, 24 साल का हो गया है उत्तराखंड से उनका क्या लेना देना है, वह 2002 में नामांकन करते हैं वह रद्द हो जाता है, वह 2004-5 में चुनाव लड़ते हैं वह पूरी तरह हार जाते हैं, 2007-8 में निशंक जी की सरकार में वह दायित्वधारी बनते हैं लेकिन वह उत्तराखंड का रुख नहीं करते हैं, 2012 में तीरथ रावत जी की कार्यकारिणी में प्रदेश प्रवक्ता बनते हैं लेकिन उनकी एक भी डिबेट एक भी बाइट किसी भी चैनल में दूर-दूर तक नहीं पाई जाती प्रदेश प्रवक्ता का पद भी उन्होंने बेकार ही किया, 2014 में वह राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी बनते हैं लेकिन उनकी तरफ से कोई सौगात उत्तराखंड को नहीं मिली और फिर 2018 में वह राज्यसभा सांसद बनते हैं लेकिन 6 साल सांसद बनने के बावजूद उन्होंने उत्तराखंड के लिए कुछ भी नहीं किया, अब ज्यादा हास्यास्पद बात यह है कि 2018 में त्रिवेंद्र रावत जी की सरकार में उन्होंने अपनी धर्मपत्नी का ट्रांसफर हल्द्वानी से दिल्ली करवा दिया अब इसमें जो परिवार पलायन का जीता जागता उदाहरण है वह नशीयत पूरे उत्तराखंड को दे रहा है, कि पलायन मत करिए, ऐसे में इससे ज्यादा मखौल और किस बात का उड़ाया जा सकता है।
रिपोर्टर :- लक्ष्मण प्रकाश
कैमरामैन :- चन्दन कुमार