
जिला सहारनपुर की तहसील बेहट के गांव चाटकी में रहने वाले अय्यूब आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। शारीरिक रूप से विकलांग होने के बावजूद अय्यूब ने कभी अपनी कमजोरी को अपने आत्मसम्मान और मेहनत के आड़े नहीं आने दिया। वह रोज़ाना सब्जी बेचकर अपने परिवार का ईमानदारी से पालन-पोषण कर रहे हैं।अय्यूब का कहना है कि जीवन में मुश्किलें तो बहुत आईं, लेकिन हार मानना उन्होंने कभी नहीं सीखा। आर्थिक तंगी और शारीरिक परेशानी के बावजूद वह हर सुबह सब्जियां लेकर निकल पड़ते हैं और गांव-गांव जाकर सब्जी बेचते हैं। इसी मेहनत से वह अपने बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चला रहे हैं।अय्यूब बताते हैं कि शुरुआत में लोगों की सहानुभूति तो मिली, लेकिन उन्होंने किसी के सामने हाथ फैलाने के बजाय खुद के पैरों पर खड़े होने का फैसला किया। आज गांव के लोग भी उनकी मेहनत और संघर्ष की सराहना करते हैं। गांववासियों का कहना है कि अय्यूब ने यह साबित कर दिया है कि अगर इंसान के अंदर हौसला और मेहनत करने की इच्छा हो, तो कोई भी शारीरिक कमी उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। अय्यूब की कहानी समाज के लिए एक मजबूत संदेश है कि विकलांगता कमजोरी नहीं, बल्कि हिम्मत और जज़्बे की परीक्षा होती है। अय्यूब जैसे लोग समाज की असली ताकत हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने की मिसाल पेश करते हैं।
रिपोर्टर ओमपाल कश्यप कैमरामैन चित्रसेन बर्मन




