
बीजेपी लोकसभा चुनाव के लिए नए सिरे से तैयारियों में जुट गई है। संगठन को मजबूत करने के साथ ही नए नए सिरे से जातीय समीकरण साधने के लिए मंथन तेज हो गया है। चुनाव को मद्देनजर यूपी में प्रदेश अध्यक्ष के साथ ही कई प्रदेश पदाधिकारी बनाए जाने हैं।उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद चुनाव में विजय पताका फहरा चुकी भाजपा के सामने अब 2024 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव बड़ी चुनौती हैं। सरकार और संगठन के डबल इंजन में से सरकार का इंजन तो लक्ष्य की ओर फर्राटा भरने लगा है, लेकिन संगठन वाले इंजन की ‘ओवरहालिंग’ अभी बाकी है। चूंकि, अब नए सिरे से जातीय समीकरण भी साधने हैं, इसलिए अभी यह भी मंथन चल रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष किस जाति-वर्ग से बनाया जाए। साथ ही प्रदेश की टीम में कई नए पदाधिकारी भी उसी के अनुरूप बनाए जाने हैं।
हालांकि, प्रयोग और अप्रत्याशित निर्णय पार्टी करती रहती है, इसलिए संगठन के सक्रिय पदाधिकारी भी टोह नहीं ले पा रहे कि अंतत: निर्णय क्या होने जा रहा है। सभी जाति-वर्गों से कई-कई संभावित नाम चर्चा में कई दिन से चल रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि अभी हाईकमान भी इस मंथन में जुटा है कि प्रदेश अध्यक्ष किस जाति से बनाया जाए। इधर, सरकार अपने काम में जुट गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभी मंत्रियों और अधिकारियों को लक्ष्य सौंप चुके हैं कि पांच वर्ष के लिए जारी किए गए लोक कल्याण संकल्प पत्र के अधिकांश संकल्प 2024 तक पूरे कर लेने हैं। अब बारी है कि सरकार के साथ समन्वय के लिए संगठन को सक्रिय किया जाए। उम्मीद जताई जा रही है कि अब जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष पर निर्णय हो जाएगा। इसके साथ ही एके शर्मा और दयाशंकर सिंह के मंत्री बनने से प्रदेश उपाध्यक्ष के दो पद खाली हो गए हैं।




